Tuesday, October 29, 2013

केसर पुष्प - इस्पात नगरी से [66]

खबर आई कि केसर (Saffron, ज़ाफ़रान) की खेती की पहचान बनाने के उद्देश्य से आज 29 अक्तूबर 2013 मंगलवार को विस्सु, जम्मू-कश्मीर में राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित केसर मेला धूमधाम से शुरू हुआ है। केसर उगाने वाले किसान और बड़ी संख्या में पर्यटक भी उपस्थित थे। 

डेढ़ सौ से अधिक सुगन्धित रसायनों से भरा केसर संसार के सबसे महंगे मसालों में से एक है। इसका स्वाद मुझे कोई ख़ास पसंद नहीं लेकिन कुछ साल पहले यूं ही मन में आया कि पिट्सबर्ग की जलवायु इसे उगाने के अनुकूल होने का लाभ उठाया जाए। बोने के लिए खोज शुरू की गयी और फिर एक ऑनलाइन स्टोर से केसर की गांठें (bulbs) मंगाई गईं।


अगस्त के महीने में थैले में बंधी हुई गांठें आ गईं। बाहर बाग में लग भी गईं। कुछ ही दिन में उनमें घास जैसे पत्ते भी आ गए। लेकिन उस साल बहुत बर्फ  पड़ने के कारण पौधे बर्फ में ढंके रहे। चूंकि गांठें हर वर्ष नई हो जाती हैं इसलिए केसर के फूलों की आशा को अगले वर्ष पर टाल दिया गया। लेकिन उस साल जब कुछ नहीं उगा तो अगले साल नई गांठें लाकर उन्हें घर के अंदर गमलों में उगाया। कुछ फूल आए तो साहस बढ़ा।

 






सीजन पूरा होने पर मैंने गमले खाली करके गांठों को ज़मीन में प्रतिरोपित कर दिया और भूल गया। पिछले हफ्ते यूं ही घास के बीच नीले फूल पर नज़र गई। अरे वाह, यह तो केसर ही लग रहा है।  

एक-एक करके कुछ फूल आ गए हैं। तीन तो खिल भी चुके हैं। एक दो दिन खिलकर मुरझा जाएँगे। तब तक केसर की खुशबू और सौन्दर्य का आनंद ले रहा हूँ।


नीली पंखुड़ियों के अंदर लंबे वाले गहरे लाल तन्तु ही केसर हैं, संसार का सबसे महंगा मसाला।

    

[आलेख व चित्र अनुराग शर्मा द्वारा :: Photos by Anurag Sharma]
* सम्बन्धित कड़ियाँ *
* इस्पात नगरी से - श्रृंखला
* कश्मीर का केसर

23 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति-

    आभार आदरणीय-

    ReplyDelete
  2. यहाँ केसर के नाम पर बहुत से दुकानों में नकली केसर मिलता है इसलिए मै हमेशा खीर वगैरे मीठे जिसमे केसर डाला जाता है ओरिजनल रंग में ही रहने देती हूँ पसंद भी कम ही करती हूँ इसे ! केसर के पौधे संबंधी यह विशेष जानकारी बहुत अच्छी लगी !

    ReplyDelete
  3. वाह, कुछ और मँगा लें और आप भी उत्पादक देश बन जायें।

    ReplyDelete
  4. दुबई में इरान से आने वाला केसर ख़ासा मंहगा ओर उत्तम क्वालिटी का माना जाता है .... धीरे धीरे अपना देश भी जाग रहा है ऐसे विषयों में ...
    फोटो बहुत सुन्दर लिए हैं आपने ...

    ReplyDelete
  5. Its leaves are looking like coriander leaves ... in pic that is second from last .

    ReplyDelete
    Replies
    1. Those coriander like leaves are from a weed growing in the neighborhood. The saffron leaves are like onion or grass leaves.

      Delete
  6. सुंदर चित्र एवं जानकारी ...!!

    ReplyDelete
  7. Awesome. I never knew we can grow kesar at home. You are absolutely right....it's a special fun. I am also going to try. Thanks Anurag ji.

    ReplyDelete
  8. क्‍या बात है बहुत ही सुन्‍दर...मन खुश हो गया बागवानी के ऐसे कार्य देख कर। एक अलग आनन्‍द है प्रकृति के बीच यूं प्रयोग करते रहना।

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर जानकारी ...................

    ReplyDelete
  10. यह तो अनूठा काम किया , आपके धैर्य को बधाई अनुराग भाई !!

    ReplyDelete
  11. अदभुद नजारा. वैसे हमारे यहां भी आसपास में कुछ किसानों ने केशर की फ़सल लेने में सफ़लता पाई है. वैसे यह गांठे मिलेगी कहां पर?

    रामराम.

    ReplyDelete
    Replies
    1. अमेरिका में तो अमेज़न जैसे ऑनलाइन स्टोर्स व विशिष्ट बीज तथा पौधे बेचने वाली दुकानों पर मिल जाता है. भारत में भी विशिष्ट नर्सरी या बीज विक्रेता, खासकर जम्मू-कश्मीर या अन्य पहाडी राज्यों में मिलने की संभावना है.

      Delete
  12. बहुत रोचक चित्रमय प्रस्तुति....

    ReplyDelete
  13. वाह !
    घर के अंदर उगने वाली चीज बताइए। आइकिया के गमले के अलावा :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. ज़मीन की सतह पर रहने वाले स्ट्राबेरी के पौधे, गमलों के लिए आदर्श हैं।

      Delete
  14. वाह...उत्तम लेखन ...दीपावली की शुभकामनाएं.....

    ReplyDelete
  15. आपके सौजन्य से केशर के फूल को पहली बार देखा -यह पुष्प का नर अंग है -मजे की बात है कि फूल के नर अंग को हिंदी में पुंकेसर ही कहते हैं,अंगरेजी में स्टेमेंन !
    और हाँ दूसरे देश का जर्म प्लाज्म मांगना तो गैर कानूनी है ?इस पहलू को आपने जांचा है?

    ReplyDelete
    Replies
    1. क़ानून के सम्मान मे अपना मुक़ाबला विरले ही कर सकेंगे।

      Delete
  16. अपुन ने तो आपके इस पोस्ट से ही केसर कि खेती का ज्ञान प्राप्त कर लिया... केसर दर्शन भी हो गए... जय हो

    ReplyDelete
  17. अनुराग जी इस सुन्दर लेख के लिए हार्दिक बधाई। मै इस फूल को देखना चाहता हूँ, क्या यह सम्भव हो सकता है। मै अभी पिट्टस बर्ग में हूँ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. भागीरथ जी, फूल तो अब नहीं बचे हैं। लेकिन मेरे ओर से आपका स्वागत है। मेरे संपर्क सूत्र के लिए अपना ईमेल/फेसबुक चेक कीजिये

      Delete
  18. जायकेदार, फूल तो कभी देखे ही नहीं थे

    ReplyDelete

मॉडरेशन की छन्नी में केवल बुरा इरादा अटकेगा। बाकी सब जस का तस! अपवाद की स्थिति में प्रकाशन से पहले टिप्पणीकार से मंत्रणा करने का यथासम्भव प्रयास अवश्य किया जाएगा।