1. वह कौन थाकहानी कहानी होती है, उसमें लेखक की आत्मकथा ढूँढना ज्यादती है. ~ अनुराग शर्मा
2. खून दो
3. खाली प्याला
4. जावेद मामू
5. सौभाग्य
6. एक दिन श्रमिक का
7. कर्मा जी की टुन्न-परेड
8. गरजपाल की चिट्ठी
9. लागले बोलबेन
10. बिच्छू
11. ह्त्या की राजनीति
12. गदा का रहस्य
13. जाके कभी न पडी बिवाई
14. एक और इंसान
15. माय नेम इज खान
16. असीम
17. अंधा प्यार
18. बांधों को तोड़ दो
19. बी. एल. “नास्तिक”
20. सच मेरे यार हैं
21. सम्बन्ध - लघुकथा
22. चोर
23. पागल
24. मैं एक भारतीय
25. नसीब अपना अपना
26. गन्जा – लघु कथा
27. शिक्षक - व्यंग्य
28. अग्नि समर्पण - व्यंग्य
29. आती क्या खंडाला?
30. टोड
31. अनुरागी मन
32. मैजस्टिक मूंछें
33. घर और बाहर
34. डैडी
35. छोटे मियाँ
36. बेमेल विवाह
37. सैय्यद चाभीरमानी और हिंदुत्वा एजेंडा
38. तहलका तहलका तहलका
39. सैय्यद चाभीरमानी और शाहरुख़ खान
40. ओसामा जी से हैलोवीन तलक - सैय्यद चाभीरमानी
41. कोकिला, काक और वो ...
42. एक शाम बार में
43. पाकिस्तान में एक ब्राह्मण की आत्मा
44. आधुनिक बोधकथा – न ज़ेन न पंचतंत्र
45. इमरोज़, मेरा दोस्त
46. क़ौमी एकता
47. नाम का चमत्कार
48. गन्धहीन
49. भोला
50. हिन्दी बंगाली भाई भाई
51. व्यवस्था
52. यारी है ईमान
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रेडिओ सलाम नमस्ते पर अनुराग शर्मा का साक्षात्कार
Hindi stories by Anurag Sharma
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यह भी कैसी विचित्र विडम्बना है कि दूसरों की कहानियाँ रचते समय मुझे सामने वाले को उसकी सम्पूर्णता के साथ अपने में मिलाना पड़ता था और इस हद तक मिलाना पड़ता था कि ‘स्व’ और ‘पर’ के सारे भेद मिटकर दोनों एकलय, एकाकार हो जाते थे। पर अपनी कहानी लिखते समय तो मुझे अपने को अपने से ही काटकर बिल्कुल अलग कर देना पड़ा। यह निहायत ज़रूरी था और इस विधा की अनिवार्यता शर्त, तटस्थता, की माँग भी लिखनेवाली मन्नू और जीनेवाली मन्नू के बीच पर्याप्त फासला बनाकर रख सकूँ। अब इसमें कहाँ तक सफल हो सकी हूँ, इसके निर्णायक तो पाठक ही होंगे....मुझे तो न इसका दावा है, न दर्प! ~ मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी)
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