Sunday, May 25, 2014

क्यूँ नहीं - कविता

(चित्र व पंक्तियाँ: अनुराग शर्मा)

इंद्र्धनुष
है नाम लबों पर तो सदा क्यूँ नहीं देते,
जब दर्द दिया है तो दवा क्यूँ नहीं देते

ज़िंदा हूँ इस बात का एहसास हो सके
मुर्दे को मेरे फिर से हिला क्यूँ नहीं देते

है गुज़री कयामत मैं फिर भी न गुज़रा
ये सांस जो अटकी है हटा क्यूँ नहीं देते

सांस ये चलती नहीं है दिल नहीं धड़के,
जाँ से मिरी मुझको मिला क्यूँ नहीं देते

सपनों में सही तुमसे मुलाकात हो सके,
हर रात रतजगे को सुला क्यूँ नहीं देते


(प्रेरणा: हसरत जयपुरी की "जब प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते")

 अहमद हुसैन और मुहम्मद हुसैन के स्वर में

15 comments:

  1. दोनों ही बहुत सुन्दर हैं. जिससे प्रेरणा ली वह भी और जो प्रेरित है वह भी...दयानिधि वत्स

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  2. प्रश्न ही प्रश्न - उत्तर कहीं नहीं !

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  3. मन उठते प्रेमपगे प्रश्न

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  4. कमाल है , बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ! बधाई भाई जी

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  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति सोमवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  6. अपनी ही जां से मिलने की यह ख्वाहिश यूँ ही बनी रहे..उम्दा पेशकश..आभार !

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  7. प्रेम में चैन भी है और बेचैनी भी.
    भावों को पकडा है.

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  8. वाह!! बहुत ही शानदार...बहुत ही सुन्दर!! वो गज़ल आज रात सुनता हूँ :)

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  9. सुन्दर शब्द - चयन । प्रशंसनीय प्रस्तुति ।

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  10. गीत /ग़ज़ल में उसीको जता क्यों नहीं देते !!

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  11. है गुज़री कयामत मैं फिर भी न गुज़रा
    ये सांस जो अटकी है हटा क्यूँ नहीं देते ..

    बहुत ही खूब और आपकी प्रेरणा भी खूब ... और गायकी का तो जवाब नहीं है हुसैन बंधुओं की ...

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  12. सुन्दर प्रस्तुति

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  13. मजा आ गया बॉस....

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  14. है गुज़री कयामत मैं फिर भी न गुज़रा
    ये सांस जो अटकी है हटा क्यूँ नहीं देते ..

    बहुत ही खूब

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