Monday, September 14, 2015

श और ष का अंतर


हिन्दी दिवस पर बधाई और मंगलकामनायें !
भारतीय भाषाओं में कुछ ध्वनियाँ ऐसी हैं जिनके आंचलिक उच्चारण कालांतर में मूल से छिटक गए हैं। कुछ समय के साथ लुप्तप्राय हो गए, कुछ बहस का मुद्दा बने और कुछ मिलती-जुलती ध्वनि के भ्रम में फंस गए। उच्चारण के विषय में इस प्रकार की दुविधा को देखते हुए इस ब्लॉग पर तीन आलेख पहले लिखे जा चुके हैं (अ से ज्ञ तक, लिपियाँ और कमियाँ, और उच्चारण ऋ का)। आज हिन्दी दिवस पर इसी शृंखला में एक और बड़े भ्रम पर बात करना स्वाभाविक ही है। यह भ्रम है श और ष के बीच का।

भारतीय वाक् में ध्वनियों को जिस प्रकार मुखस्थान या बोलने की सुविधा के हिसाब से बांटा गया है उससे इस विषय में किसी भ्रम की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए परंतु हमारे हिन्दी शिक्षण में जिस प्रकार वैज्ञानिकता के अभाव के साथ-साथ तथाकथित विद्वानों द्वारा परंपरा के साथ अस्पृश्यता का व्यवहार किया जाता है उससे ऐसे भ्रम पैदा होना और बढ़ना लाज़मी है।

आरंभ "श" से करते हैं। श की ध्वनि सरल है। आमतौर पर विभिन्न भाषाओं में और भाषाओं से इतर आप श (SH) जैसी जो ध्वनि बोलते सुनते हैं वह श है। यदि आज तक आप श और ष को एक जैसे ही बोलते रहे हैं तो यक़ीन मानिए आप श की ध्वनि को एकदम सही बोलते रहे हैं, अलबत्ता ष का कबाड़ा ज़रूर करते रहे हैं। ओंठों को खोलकर, दंतपंक्तियों को निकट लाकर, या चिपकाकर, जीभ आगे की ओर करके हवा मुँह से बाहर फेंकते हुये श आराम से कहा जा सकता है। श बोलते समय जीभ का स्थान स से थोड़ा सा ऊपर है। वस्तुतः यह एक तालव्य ध्वनि है और इसके बोलने का तरीका तालव्य व्यंजनों (चवर्ग) जैसा ही है। इसमें कुछ विशेष नहीं है।

अब आते हैं ष पर। जहां श तालव्य है, ष एक मूर्धन्य ध्वनि है। कई शब्दों में आम वक्ता द्वारा "श" जैसे बोलने के अलावा कुछ भाषाई क्षेत्रों में इसे "ख" जैसे भी बोला जाता है। अगर स और श से तुलना करें तो ष बोलने के लिए जीभ की स्थिति श से भी ऊपर होती है। बात आसान करने के लिए यहाँ मैं बाहर से आई एक ध्वनि को भी इस वर्णक्रम के बीच में जोड़ कर इन सभी ध्वनियों को जीभ की स्थिति नीचे से उठकर उत्तरोत्तर ऊपर होते जाने के क्रम में रख रहा हूँ

स (s) => श (sh) => ज़ (z) => ष (?)

कहते समय क्षैतिज (दंत्य) रहा जीभ का ऊपरी सिरा कहने तक लगभग ऊर्ध्वाधर (मूर्धन्य) हो जाता है। इन दोनों ध्वनियों के बीच की तालव्य ध्वनि आती है। शब्दों में के प्रयोग का त्वरित अवलोकन इसे और सरल कर सकता है। आइये ऐसे कुछ शब्दों पर नज़र डालें जिनमें का प्रयोग हुआ है -

विष्णु, जिष्णु, षण्मुख, दूषण, ऋषि, षड, षडयंत्र, षोडशी, षडानन, षट्‌कोण, चतुष्कोण, झष, श्रेष्ठ, कोष्ठ, पुष्कर, कृषि, आकर्षण, कष्ट, चेष्टा, राष्ट्र, संघर्ष, ज्योतिष, धनिष्ठा, निरामिष, पोषण, शोषण, भाषा, परिषद, विशेष

संस्कृत वाक् में ध्वनियों को सहज बनाने का प्रयास तो है ही, उनके मामूली अंतर को भी प्रयोग के आधार पर चिन्हित किया गया है। यद्यपि उपरोक्त अधिकांश शब्दों में ष को श से प्रतिस्थापित करना आसान है लेकिन आरंभ के शब्दों में यदि आप यह प्रतिस्थापन करेंगे तो आप शब्द को प्रवाह से नहीं बोल सकते। यदि अंतर अभी भी स्पष्ट नहीं हुआ है तो निम्न दो शब्दों को प्रवाह से बोलकर देखिये और उनमें आने वाली SH की ध्वनि (और जिह्वा की स्थिति) के अंतर को पकड़िए -

विष्णु और विश्नु या विष्णु और विश्ड़ु

मूर्धन्य स्वर ऋ तथा मूर्धन्य व्यंजनों र, ट, ठ, ड, ढ, ण के साथ ‘ष’ की उपस्थिति सहज और साभाविक है। ण के साथ तो ष का चोली-दामन का साथ है। इसके अतिरिक्त अवसरानुकूल अन्य वर्गों के वर्णों (उपरोक्त उदाहरणों में क, घ, त आदि) के साथ भी प्रयुक्त किया जा सकता है। एक बार फिर एक सरल सूत्र -
स - दंत्य
श - तालव्य
ष - मूर्धन्य

क्या भाषा/लिपि पढ़ाते समय इन ध्वनियों को अंत में एक साथ समूहित करने के बजाय संबन्धित व्यंजनों के साथ पढ़ाया जाना चाहिए ताकि गलतियों को रोका जा सके? 
* हिन्दी, देवनागरी भाषा, उच्चारण, लिपि, व्याकरण विमर्श *
अ से ज्ञ तक
लिपियाँ और कमियाँ
उच्चारण ऋ का
लोगो नहीं, लोगों
श और ष का अंतर

22 comments:

  1. "क्ष" के उच्चारण पर भी कुछ प्रकाश डालें ।

    ReplyDelete
  2. इस उपयोगी व आवश्यक जानकारी के लिये आभार आपका . श और ष के बीच का अन्तर बड़े सरल व स्पष्ट रूप से बताया है . मैं भी जब तक स्वाध्याय द्वारा नही पढ़ा था ,इस अन्तर से अनभिज्ञ रही .इनका परिचय बचपन से ही शरीफा का श और षटकोण का ष के रूप में ही दिया गया था . अब भी शिक्षक प्रायः ऐसा ही करते हैं .

    ReplyDelete
  3. सरल शब्दों में दोनों शब्दों के अंतर को स्पष्ट किया है ... कई बार सोचता हूँ कितनी वैज्ञानिक भाषा है अपनी ... जिसपे गर्व होना स्वाभाविक है ...

    ReplyDelete
  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, स्कूली जीवन और बॉलीवुड के गीत - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  5. बहुत सालो बाद समझ आया । बहुत बहुत धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  6. बड़ी कुशलता से श और ष का अंतर स्पष्ट कर दिया आपने !

    ReplyDelete
  7. श से शहामृग ष से षटकोण बचपन में रटाया हुआ आज भी याद है
    लेकिन जिस प्रकार से आपने विस्तार किया है बहुत ही उपयोगी लगा !

    ReplyDelete
  8. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार....

    ReplyDelete
  9. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार....

    ReplyDelete
  10. ज्ञानवर्धक

    ReplyDelete
  11. ये बढ़िया बताया आपने

    ReplyDelete
  12. बहुत बहुत धन्यावाद । सब कुछ समझ में नहीं आया । कुछ शब्द काफी कठिन थे। पता नहीं मैं कैसे इतने साहस के साथ कहता हूँ कि हिंदी मेरी मात्रभाषा है। अच्छा लगा देखकर कि यह इतने विस्तार में यहाँ पर समझाया गया है ।

    ReplyDelete
  13. साभार आपका जानकारी के लिए साँझा कर रही हूँ

    ReplyDelete
  14. गुरुशा लिखेंगे की गुरुषा

    ReplyDelete
  15. आदरणीय अनुराग जी, हिंदी भाषा की शिक्षिका हूँ, वो भी अंग्रेजी माध्यम की पाठशाला में... बच्चे कई बार पूछते हैं कि श और ष का उच्चारण तो एक जैसा है, फिर ये दो क्यों ? और कैसे पता चले कि किस शब्द में श आएगा और किसमें ष ? आपके इस आलेख द्वारा उनकी शंकाओं का समाधान करने में और मदद मिलेगी। सादर, सविनय धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  16. Spectrum: वर्णक्रम
    Spectroscopy: वर्णक्रमिकी

    ReplyDelete
  17. ष और श में अंतर बहुत अच्छे से तथा सरलता से समझाया है। बहुत बहुत धन्यवाद।

    ReplyDelete
  18. ष का उच्चारण ख कहाँ-कहाँ होता है .....?
    जैसे- आषाढ़=आखाढ़... वर्षा=वरखा....

    ReplyDelete

मॉडरेशन की छन्नी में केवल बुरा इरादा अटकेगा। बाकी सब जस का तस! अपवाद की स्थिति में प्रकाशन से पहले टिप्पणीकार से मंत्रणा करने का यथासम्भव प्रयास अवश्य किया जाएगा।