Wednesday, January 6, 2010

ख्याल अपना अपना

(अनुराग शर्मा)

नज़र अपनी-अपनी ख्याल अपना अपना
हकीकत वही है ख्वाब अपना अपना

अगर दिल की मंज़िल के संकरे हैं रस्ते
मुहब्बत है पक्की हिसाब अपना अपना

गिरा के दीवारें जलाया मकाँ जो
मुड़ मुड़ के देखा लगा अपना अपना

सुर्खी हिना की महावर की लाली
लहू से निखारें शबाब अपना अपना

जीवन है नश्वर टिकेगा ये कब तक
सवाल इक वही है जवाब अपना अपना

23 comments:

  1. भैया, आप तो पूरे दार्शनिक हो गए हैं !
    इतनी रवानी के साथ फरमाया है! गुनगुनाए जा रहे हैं।
    @ मुहब्बत है पक्की हिसाब अपना अपना

    बहुत गहरी बात कह दी आप ने !

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर कविता या कहे हकीकत

    ReplyDelete
  3. प्रिय अनुराग,

    बहुत सुन्दर रचना । आपने बहुत सारा काम किया है उसे पढ रहा हूँ, सुन रहा हूँ और प्रसन्न हो रहा हूँ । मुझे राम कथा में एम्पी3 आडियो ब्लाग पर पोस्ट करने में दिक्कत हो रही है । उसका हल खोजने की कोशिश कर रहा हूँ । बार बार विंडो मूवी मेकर के माध्यम से आना तो तकलीफ़ देह है । संभव हो तो मार्गदर्शन दें । आभारी रहूँगा ।

    ReplyDelete
  4. सुर्खी हिना की महावर की लाली
    लहू से निखारें शबाब अपना अपना

    जीवन है नश्वर टिकेगा ये कब तक
    सवाल इक वही है जवाब अपना अपना

    BAHUT GAHRA DARSHAN CHIPA HAI IN JEEVANT SHERON MEIN .... LAJAWAAB GAZAL HAI ...

    ReplyDelete
  5. अनुराग जी
    सादर वन्दे!
    बहुत ही सुन्दर व दर्शन से भरी है ये रचना, कवि की सार्थकता इसी में होती है कि वह कहता कम शब्दों में है किन्तु उसके अर्थ हजार होते हैं.
    रत्नेश त्रिपाठी

    ReplyDelete
  6. जीवन है नश्वर टिकेगा ये कब तक
    सवाल इक वही है जवाब अपना अपना...........
    बहुत सुंदर .

    ReplyDelete
  7. बहुत जबरदस्त, अनुराग भाई..वाह!

    ReplyDelete
  8. सवाल वही है जवाब अपना अपना ! वाह !

    ReplyDelete
  9. गिरा के दीवारें जलाया मकान जो
    मुड़ के जो देखा लगा अपना अपना
    बहुत ही सुंदर रचना

    ReplyDelete
  10. सहज सरल शब्दों में गेयता और सशक्त अभिव्यक्ति की कविता -एकम सद विप्राः बहुधा वदन्ति की भी याद आ गयी न जाने क्यूं !

    ReplyDelete
  11. सवाल एक वही ...जवाब अपना अपना ...
    दार्शनिक खयाल...!!

    ReplyDelete
  12. जीवन है नश्वर टिकेगा ये कब तक
    सवाल इक वही है जवाब अपना अपना
    बेहद सार्थक अभिव्यक्ति ...सुन्दर
    regards

    ReplyDelete
  13. जीवन है नश्वर टिकेगा ये कब तक
    सवाल इक वही है जवाब अपना अपना
    अति सुन्दर !

    ReplyDelete
  14. सुर्खी हिना की महावर की लाली
    लहू से निखारें शबाब अपना अपना


    वाह, लाजवाब अभिव्यक्ति.

    रामराम.

    ReplyDelete
  15. रात टिप्पणी पोस्ट नहीं सकी. छोटे छोटे वाक्यों में सुन्दर रचना.

    ReplyDelete
  16. Anuraag ji,
    pakki baat kahi hai sahi hisaab se...
    sawaal poochne lage baat ab jawab se..

    bahut khoob..!!
    gaane ko dil kar raha hai..

    ReplyDelete
  17. अदा जी,

    हम धन्य भये. शौक से गाइए. संगीत के साथ गाईये और रेकॉर्डिंग की एक कॉपी हमें भी भेजिए.

    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  18. गिरा के दीवारें जलाया मकाँ जो
    मुड़ के जो देखा लगा अपना अपना
    बड़े सहज शब्दों में जीवन का गूढ़ अर्थ बता दिया ग़ज़ल ने...सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  19. बहुत सुंदर शब्द
    मैंने इसे बहुत पहले ही पढ़ लिया था फिर कई और बार पढ़ा, कुछ लिखा कुछ मिटाया कि क्या कहूँ आपके इन शब्दों पर... वैसे कहने को इसके सिवा कुछ नहीं है कि पसंद में शामिल है ऐसी रचनाएँ. आप साहित्य के सच्चे साधक हैं.

    ReplyDelete
  20. केवल दर्शन ही नहीं, साहित्य और अध्यात्म भी घुल मिल गये हैं इस रचना में बखूबी !

    सुन्दर प्रविष्टि ! आभार ।

    ReplyDelete

मॉडरेशन की छन्नी में केवल बुरा इरादा अटकेगा। बाकी सब जस का तस! अपवाद की स्थिति में प्रकाशन से पहले टिप्पणीकार से मंत्रणा करने का यथासम्भव प्रयास अवश्य किया जाएगा।