Saturday, January 9, 2010

पीड़ित भी अपराधी भी [इस्पात नगरी से - २३]

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ब्लॉग जगत भी हमारे संसार का ही छोटा रूप है. हर तरह के लोग, हर तरह की नज़र. किसी को दुनिया की सारी कमियाँ अमेरिका से ही शुरू होती दिखती हैं जबकि किसी के लिए यौन-अपराध का मूल कारण कुछ नारियों के परिधान-चुनाव के सिवा कुछ नहीं है. ऐसे में मैं अपराध से सम्बंधित दो अमेरिकी पत्रों को आपके साथ बांटने का ख़तरा उठा रहा हूँ. पिछले हफ्ते केवल चार दिन के अंतराल में यहाँ अमेरिका में अपराध से सम्बंधित दो ऐसी रिपोर्टें देखने को मिलीं जो चौंकाती भी हैं और आँखें भी खोलती हैं. इन दोनों रिपोर्टों का उभयनिष्ठ तत्व बाल-अपराधी हैं.

न्याय विभाग के एक अध्ययन ने यह खुलासा किया है कि बाल सुधार गृहों में रहते हुए समय में लगभग १२% लोग यौन-शोषण के शिकार बनते हैं. इस अध्ययन में कुल १९५ सुधार ग्रहों के १३ से २१ वर्ष की आयु के ९१९८ निवासियों को शामिल किया गया था. इस रिपोर्ट के आने के बाद कुछ राज्यों ने अपने सुधार गृहों की स्वतंत्र जांच कराने का निर्णय लिया है.

न्याय विभाग की ही सन २००४ के आंकड़ों पर आधारित एक अन्य रिपोर्ट से एक खुलासा यह हुआ है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन शोषण के मामलों में अपराध करने वाले ३६% लोग बच्चे (१८ वर्ष से कम वय) ही हैं. हालांकि हर आठ में सिर्फ एक ही बारह वर्ष से कम आयु का है. इन बाल यौन-अपराधियों में ९३% लड़के और सात प्रतिशत लडकियां हैं.

इस रिपोर्ट का कहना है कि बहुत से ऐसे अपराधों की शुरूआत उत्सुकतावश शुरू होती है और समुचित यौन-शिक्षा की सहायता से बच्चों को सही उम्र में सही गलत का भेद समझाकर इन गलतियों में कमी लाई जा सकती है. स्कूलों में यौन-शिक्षा पर पहले भी बहुत सी ब्लॉग-बहसें हो चुकी हैं. मेरा उद्देश्य उन्हें पुनरुज्जीवित करना नहीं है मगर असलियत से आँखें मूंदना भी गैर-जिम्मेदाराना ही है.
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इस्पात नगरी से - पिछली कड़ियाँ
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19 comments:

  1. सच कहा। यौन क्राएम के लिए बच्चों में उत्सुकता भी जिम्मेदार है. बहुत पुराने जमाने से देहात के बच्चे भी सोडोमी मे लगे पाए गए हैं.उन्हें बड़े ही बिगाडते है.

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  2. आप ने बिलकुल सही फरमाया। यौन शिक्षा किसी भी बालक के लिए उसी दिन से अत्यावश्यक हो जाती है जिस दिन वे लिंगभेद समझना आरंभ कर देते हैं।

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  3. एक जीव ऐसा भी है जो अपने जीवन में मात्र एक बार सम्भोग करता है और -सम्भोग काल में ही मार जाता है-फिर भी करता है ! बच्चो में उच्च संस्कार के साथ साथ यौन शिक्षा अपेक्षित है। बच्चे तो क्या बड़ों में भी यौन के प्रति अनेक कुंठाएं व्याप्त हैं। महारिशी वात्सयायन ने कामसूत्र में समाज को यौन कुंठाओं से निवृत करने का ही प्रयास किया है।

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  4. आँखें खोलती है आपकी जानकारी .........

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  5. जी सच कह रहे हैं !

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  6. कोई कितना भी अनर्गल प्रलाप करे पर बात सही है और उसे मंजूर भी करना पडेगा.

    रामराम.

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  7. आप की बात से सहमत है जी

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  8. यौन अपराध वह भी जुवेनाइल यौन अपराध निश्चय ही किसी भी समाजविज्ञानी के लिये अध्ययन का विषय बनता है।

    बच्चों में मेधा और कौतूहल का जबरदस्त विस्फोट हो रहा है। ऐसे में बहुत कुछ अच्छा भी होगा और बहुत कुछ बहुत बुरा भी।

    हम शायद दर्शक मात्र बन सकते हैं इस परिवर्तन के।

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  9. आधुनिकता की दौड भी जिम्मेदार है . हमारे छोटे गांव में भी जरा जरा से बच्चे भी पोर्न फ़िल्मे देख रहे है

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  10. हमें बच्चों को बचाने का बीड़ा उठाना ही होगा ,यहाँ के बाल सुधार गृहों की हालत तो और खराब है

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  11. "ब्लॉग जगत भी हमारे संसार का ही छोटा रूप है. हर तरह के लोग, हर तरह की नज़र..."

    सही लिखा है जी!

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  12. जानकारी अच्छी है, लेकिन पता नहीं इस समस्या से निजात कब और कैसे मिलेगी.

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  13. Sahi kaha aapne....sthiti dinodin jis prakaar se bhayavah hoti ja rahi hai,ise rokne ke liye gambheer prayaas karne honge,anyatha youn jugupsa ek bhare poore jeevan ko andhkaarmay bana degi......

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  14. सच है कि मानव समाज के शास्त्र को पढ़ना और उसे समझना बेहद कठिन है. हम अक्सर आग्रह और पूर्वाग्रहों से ही प्रेरित वक्तव्य दिया करते हैं. आपने चाँद शब्दों में कई विषयों पर पुनर्विचार को मजबूर किया है.

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  15. यह सच्चाई है, जिससे मूंह नहीं मोडा जा सकता. भारत में भी कमोबेश यही स्थिति हो सकती है, शहरों में, अगर अभी से नहीं चेते.

    क्या कोई रास्ता है?

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  16. मैं आपसे सहमत हूँ। पूर्वाग्रहों से भरी हमारी औसम मानसिकता इसमें सबसे बडी बाधा लगती है। 'यौन शिक्षा' का अर्थ भाई लोग 'यौन कर्म शिक्षा' ही लगाते हैं।

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  17. सत्य वचन !
    सही शिक्षा और उनके कर्म की समझ उनमें पैदा करके बहुत सी परेशानियों से बचा जा सकता है ।
    प्रविष्टि का आभार ।

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