Saturday, January 2, 2010

नव वर्ष

नव वर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएं!

मङ्गलम
सत्य का प्रकाश
उदारता आकर्ष

हिंसा विलुप्त
सहिष्णुता प्रकर्ष

प्रेम की विजय
लुप्तप्राय अमर्ष

बहुजन हिताय
जीवन उत्कर्ष

शोषण का नाश
इस पर विमर्श

विकसित शिक्षित
सबके हिय हर्ष

क्षुधा पिपासा शांत
संपन्न भारतवर्ष

निर्विघ्न सत्कार्य
एवमस्तु नववर्ष

(अनुराग शर्मा)

Tuesday, December 29, 2009

ये बदनुमा धब्बे

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मेरे शुभचिंतक
जुटे हैं दिलोजान से
मिटाने
बदनुमा धब्बों को
मेरे चेहरे से
शुभचिंतक जो ठहरे
लहूलुहान हूँ मैं
कुछ भी
देख नहीं सकता
समझा भी नहीं पाता
किसी को कि
ये धब्बे नहीं
मेरी आँखें हैं!

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