Saturday, January 28, 2012

अंतर्मन - कविता

(अनुराग शर्मा)

ॐ सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते ...
पर्वत के पीछे
बरगद के नीचे

अपनों के देस में
निपट परदेस में

दुश्मन के गाँवों में
बदले के भावों  में

गन्दी सी नाली में
भद्दी सी गाली में

मन की दरारों में
कुत्सित विचारों में

तम के अनेक रूप
लेकिन बस एक धूप

किरण जहाँ जाती है
हृदय जगमगाती है॥

42 comments:

  1. वाह आप तो प्रभावी कविता भी खूब लिखते हैं

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  2. किरण की दिशा हमने देख ली, बढ़ते वहाँ हर पल..

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  3. किरण -ये कोई नया नाम लगता है ....ब्लाग जगत में अभी तक सुना नहीं!

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  4. जी, वाकई, एक ही किरण बहुत से तम को दूर कर देती है..

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  5. sarthak vicharon ki manovritti ko poshit karati kavi achhi lagi .sadhuvad ji /

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  6. विदेश में रहना, कभी कभार अपन गांव-घर जाना और वहां से दर्द की इतनी बड़ी गठरी लाद लाना! आह! यह गीत, आपकी पीड़ा का एहसास हमको भी कराती है अनुराग जी। बस एक 'धूप' के सहारे ही तो काटनी है जिंदगी।

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  7. तम के अनेक रूपों में एक किरण ही काफी है ख़ुशी का अहसास दिलाने के लिए ।
    बढ़िया ग़ज़ल ।

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  8. अंतर्मन के इतने रूप!! कहाँ कहाँ भटकता है यह!!

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  9. अद्भुत भाव है, अंधेरे कैसे भी हो, कहीं भी हो, कितने भी घने हो ज्ञान रूपी एक प्रकाश किरण जीवन को उज्जवल कर देती है।

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  10. तम का यह रूप सहेज कर रखें।

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  11. कितना सुंदर शब्द संयोजन..... सुंदर रची पंक्तियाँ

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  12. तम के अनेक रूप
    लेकिन बस एक धूप

    किरण जहाँ जाती है
    हृदय जगमगाती है॥


    aapki kavita padh kar man prsnn ho gaya hai.

    kai din se laptop aur net men samsya thi.
    doosre laptop se tippani kar raha hun,jisme Hindi
    type nahi kar paa raha hun.

    aapko basant panchami ki shubhkamanayen.

    smay milne par mere blog par aaiiyega.

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  13. बहुत सुन्दर, श्रेष्ठ हमेशा श्रेष्ठ ही रहता है, उसे साबित करने के लिए पापड नहीं बेलने पड़ते !

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  14. वाह!!!!खूबसूरत!!!!!! :):)

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  15. थोडे में, खासकर छोटी-छोटी पंक्तियों में, अपनी बात कह देना अपने आप में सुन्‍दरता है। उस पर कविता की सुन्‍दरता। अद्भुत।

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  16. "किरण जहां जाती है " ...
    जहां नहीं जाती ?

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  17. ज़रूर उम्मीद कायम रहे ,रहना भी चाहिये पर...

    तम के अनेक रूपों में से एक ( अंतर्मन के ) ब्लैक होल्स भी हुआ करते हैं जहां किरण से भी कोई उम्मीद नहीं :(

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  18. कोई भी रूप हो तम का ,रोशनी की किरण अबाध पहुँच जाती है - जितना गहन अँधेरा, उतना उजला प्रकाश का फेरा !

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  19. गंदी नाली हो या भद्दी गाली... अपना देस ही प्यारा लगता है :)

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  20. अद्भुत भाव है, अंधेरे कैसे भी हो, कहीं भी हो, कितने भी घने हो ज्ञान रूपी एक प्रकाश किरण जीवन को उज्जवल कर देती है।

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  21. मन को लुभाती है
    कविता बतियाती है

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  22. किरण जहाँ जाती है
    हृदय जगमगाती है॥
    sir speechless lines .
    PRANAM

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  23. अपनों के देस में
    निपट परदेस में

    किरण सबकी साझा है
    ज्ञान की ही भाषा है

    बिना नस्ल भेद के
    बिना किसी खेद के

    खुले रखते दिल द्वार है
    वहां होती आर पार है

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  24. "किरण जहाँ जाती है..."
    एकदम सच है और यही ग्रहण योग्य सत्य है।

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  25. किरण जहाँ भी जाती है , जगमगाती है !
    सचमुच !

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  26. तम के अनेक रूप
    लेकिन बस एक धूप

    बिलकुल सच...जिसके हिस्से धूप आया...उसका जीवन जगमगाया

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  27. जी हां, धूप है, मानो आस है!

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  28. ज्ञान की एक किरण ही पर्याप्त है मन की दरारों में प्रवेश करने के लिए .......
    उत्तम रचना .......

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  29. किरण जहाँ जाती है
    हृदय जगमगाती है॥...
    सकारात्मक उर्जा का संचार करती कविता...

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  30. छोटी सी मनमोहक कविता!
    घुघूतीबासूती

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  31. किरण जहाँ जाती है
    हृदय जगमगाती है॥

    सार्थक, आभार

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  32. तम के अनेक रूप पर ज्योति एकही है...बहुत सुंदर भाव!

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  33. छोटी मगर गहरा असर छोडती रचना ....
    आभार आपका !

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  34. एक धुप ही बहुत है जगमगाने के लिए..तम को भगाने के लिए..

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  35. वाह!!!

    बेहद खूबसूरत...

    शुक्रिया..

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  36. सदा जी की हलचल पर आपकी सुन्दर प्रस्तुति देखकर बहुत अच्छा लगा.
    बहुत ही उम्दा है यह प्रस्तुति.

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  37. परिभाषा तो असत्य की ही हो सकती है ! रूप,गुण ,स्वभाव में भले ही असत्य के कितने ही रूप क्यों न हो लेकिन सबको जोड़ने वाली भीतर सजीव ज्योति किरण एक समान है जिसकी कोई परिभाषा शब्दों में नहीं हो सकती, काफी है एक किरण स्त्रोत तक पहुंचा देती है, सुन्दर रचना !

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