Thursday, January 12, 2012

सीमा - कविता

कैसा होता है प्यार? जीत के सब बस हार
सीमा तुम जकड़े थीं मुझको 
अपनी कोमल बाँहों में 
भूल के सुधबुध खोया था मैं 
सपनीली राहों में 
छल कैसा सच्चा सा था वह 
जाने कैसे उबर सका 
सत्य अनावृत देखा मैंने 
अब तक था जो दबा ढंका 
सीमा में सिमटा मैं अब तक 
था कितना संकीर्ण हुआ 
अज्ञ रहा जब तक असीम ने 
मुझको नहीं छुआ।

38 comments:

  1. सीमित होने के अपने सुख और दुःख हैं !

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  2. अनुराग जी ,अपने ब्लॉग की सेटिंग ठीक कर लो...इस पोस्ट को पढ़ लें !
    http://primarykamaster.blogspot.com/2012/01/blog-post_12.html

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  3. Replies
    1. उत्तर भी वहीँ दीजिये महाराज :-)
      शुभकामनायें !

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    2. उत्तर पहले दे दिया। सैटिंग बाद में बदली, क्योंकि एक कारण से मैं रुकने की सोच रहा था।

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  4. सुन्दर कविता ..गहरे अर्थ..
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है
    kalamdaan.blogspot.com

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  5. बह्त ही सुन्दर कथन!!

    अज्ञ रहा जब तक असीम ने
    मुझको नहीं छुआ।

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  6. दायरों से निकलकर ही अनंत की खोज की जा सकती है..सुन्दर.

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  7. सुन्दर रचना. किसी ने बताया की दो 0 (शून्य) से मिलकर 8 बनता है .8 दिशाए हैं.

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    1. सुब्रामणियन जी, आभार! दो शून्य मिलकर अनंत (∞) का चिंन्ह भी बनता है।

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  8. अज्ञ रहा जब तक असीम ने
    मुझको नहीं छुआ...
    सुन्दर !

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  9. सीमाओं से घिरे हुये जाने कितने जीवन तड़पे हैं।

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  10. यह कौन वाली सीमा है?

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  11. असीम फलक को छूते हुए भी न जाने क्यों सीमा में बंधना अच्छा लगता है ..

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  12. असीम का अनुबोध संतृप्त करने में सक्षम है
    प्यारी और प्रेरणास्पद रचना ..

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  13. खूब-सूरत प्रस्तुति |
    बहुत-बहुत बधाई ||

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  14. अज्ञ रहा जब तक असीम ने
    मुझको नहीं छुआ।

    सीमा में रहकर सोच भी सीमित हो जाती है....सुन्दर कविता

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  15. आज हम भी सुब्रमनियन जी और आपके संवाद के साथ :)

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  16. सीमा में रहने से ज्ञान भी सीमित रह ही जाता है ।

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  17. अज्ञ रहा जब तक असीम ने
    मुझको नहीं छुआ।
    bahut sundar ....

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  18. बहुत बढ़िया!
    लोहड़ी पर्व की बधाई और शुभकामनाएँ!

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  19. सीमाओं का आलिंगन और असीम का चुम्बन... बहुत खूब!!

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  20. प्रेम की कोई सीमा नहीं होती और निश्चल पेम में कुछ दबा-ढंका नहीं होता॥

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  21. बिहारी से शुरू करके कबीर तक ले गए हो गुरु |

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  22. सीमा में असीम का बोध...परम-अवस्था!!!

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  23. 'स्‍व' के 'सर्व' में परिवर्तित हो जाने की एक अनुभूति।

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  24. स्वस्थ, सुखद अनुभूति। बहुत खूब।

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  25. लगता है कोई उच्चाटन की दशा है :)

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  26. सीमानुराग! सीमा का अनुराग! :)

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