Sunday, April 8, 2012

खट्टे अंगूर - कविता

(अनुराग शर्मा)

काँटों का सौन्दर्य
सूरज क्रूर
रेत तन्दूर
वृक्ष खजूर

छिन्न गरूर
मिटता नूर
घायल शूर

विरह दस्तूर
सनम मगरूर
सदा मखमूर

फ़र्जी मंसूर
खफ़ा हुज़ूर
प्रीतम दूर

रंज भरपूर
वे मशहूर
मैं मजबूर

45 comments:

  1. अनुराग जी अपुन तो नि:शब्द.

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  2. एकदम अलग तरह की कविता । अनूठी ।

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  3. बहुत सुन्दर ... कविता अद्भुत

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  4. वाह!! हमेशा की तरह गागर में सागर……
    रंज़ भरपूर
    वे मशहूर
    मैं मजबूर

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  5. विरह दस्तूर
    सनम मगरूर
    सदा मखमूर

    सही है ....यह सब हिस्सा है जीवन के विभिन्न पड़ावों का .....!

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  6. बड़ी महीन कवि‍ता हो गई जी

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  7. वकालत -ए-अल्फाज,जूनून-ए-शराफत,दास्तान-ए-मंजर लियाकत के साथ पोशीदा भी है ..शुक्रिया जनाब

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  8. वाह!!!!!!

    देश से दूर
    भक्ति से चूर
    मानों महके कपूर

    पढ़ कर रचना आनंदित हूँ.

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  9. छिन्न गरूर
    मिटता नूर
    घायल शूर

    Waah... Kam shabdon me Khoob Kaha Aapne...

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  10. ये भाई
    कहाँ घुसे आ रहे हो--
    इन छोटी खुबसूरत कटारों को थामे--

    ठहरो--

    वोह

    बड़ी तीक्ष्ण धार |
    खबरदार --
    अतिक्रमण नहीं --

    आप तो सचमुच के स्मार्ट हैं |

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  11. मैं भी यही कहने वाला था. माइक्रो सोफ्ट.

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  12. हमेशा की तरह कम शब्दों में अधिक बात.

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  13. is chhoti si kavita pr tipiyangua jarur..........

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  14. इतने दूर
    भाव भरपूर
    हम मशकूर!!

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  15. वाह ...बहुत ही बढि़या ।

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  16. सूरज क्रूर
    रेत तन्दूर
    वृक्ष खजूर
    वाह बहुत सुंदर
    एकसे एक .........

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  17. सूरज क्रूर
    रेत तन्दूर
    वृक्ष खजूर ...

    मुसाफिर का क्या होने वाला है ऐसे में ... दुबई की गर्मी में ऐसा नज़ारा कल्पना लोक की दुनिया से निकल के सच्चा हो जाता है कभी कभी ...

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  18. वाह हुज़ूर
    मज़ा भरपूर
    हाइकु दूर

    एक दम ताज़ा प्रयोग .

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  19. वाह क्या बात है ..बहुत बढ़िया.

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  20. शब्दों का ऐसा जादू कम ही देखने को मिलता है...बधाई!

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  21. छोटे हैं,पर खोटे हैं !!

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  22. सब कुछ निस्‍सन्‍देह सुन्‍दर तो है किन्‍तु कविता का यह काक्‍नसा रूप है? यह न तो गजल है, न ही हाईकू। यदि यह अपने किसम का पहला प्रयोग है तो फौरन ही इसका कॉपी राइट करवा लीजिए।

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  23. (अपना ही ब्लॉग)पहुँच से दूर.
    (क्या लिखें?) खट्टे अंगूर!!

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  24. बहुत ही खूब
    मज़ा भरपूर

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  25. वाह!
    मखमूर का क्या अर्थ हुआ?
    घुघूतीबासूती

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  26. gajab ki prastuti sunder bhav
    rachana

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  27. ये न हुई कविता..अच्छी लगी..

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  28. :)chasmebaddur ....
    very nice itne kam shbd itni pyari kavita....

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  29. SIR PRANAM.BEAUTIFUL LINES.
    EACH AND LINE AND WORD SPEAS
    BUT I AM SPEECHLESS.

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  30. रंज़ भरपूर
    वे मशहूर
    मैं मजबूर------अनु जी -पढ़ने को मन आतुर

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  31. प्रत्येक शब्द प्रति लाइन मूल्यवान सुन्दर गहरे अर्थ लिए
    अनोखी रचना .

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  32. कमाल की तुकबंदी!

    शब्द-शब्द अर्थ फैलते ही जाते हैं
    पढ़ने वाले मोहित हो रह जाते हैं।

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  33. wow...angoor bhale hi ho khatte but for me its short and sweet :)

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