Thursday, June 10, 2010

बोनसाई - कुछ स्वर्गीय, कुछ पार्थिव

दिल्ली में मेरी बालकनी पर सौ बोनसाई रहती थीं. यहाँ आया तो बहुत समय तक अपार्टमेन्ट में रहते कुछ किया नहीं,धीरे-धीरे फिर से हाथ आजमाना शुरू किया. मौसम अतिवादी होता है फिर भी कई पौधे कई-कई साल चले मगर एक छोटे से पाकड़ के अलावा अभी कुछ भी जीवित नहीं है. कुछ झलकियाँ:

ये पौधे भगवान को प्यारे हो गए!

 केला 

पाकड़
लीची
अकेला जीवित पाकड़

सभी चित्र अनुराग शर्मा द्वारा
[Bonsai: Photos by Anurag Sharma]

23 comments:

  1. ानुराग जी तस्वीरें बहुत सुन्दर हैं जब भी मै गमले मे लगे हुये इन पौधों को देखती हूँ तो लगता है कि हम ने इन्हें गमलों मे कैद कर के इन से इनका जीवन छीन लिया है जैसे चिडिया को पिंजरे मे कैद कर के उसकी उडान को सीमित कर देते है। लेकिन देखने मे मन को लुभाते हैं । कल हिन्द युग्म से आपकी पुस्तक प्राप्त हुई अभी पढ नही पाई मगर पुस्तक की साज सज्जा मन को छू गयी। आपका धन्यवाद एक दो दिन मे पढती हूँ।

    ReplyDelete
  2. निर्मला जी,
    ज़र्रानवाज़ी का शुक्रिया. आपका आशीर्वाद है!

    ReplyDelete
  3. पौधों और प्रकृति के आपका असीम प्रेम हैं..चित्र देख कर कुछ ऐसा ही लगता है बढ़िया सहेजे है...प्रस्तुति के लिए धन्यवाद

    ReplyDelete
  4. अच्छा लगा बोनसाई की तस्वीरें देखना...

    ReplyDelete
  5. Tasviron ne man moh liya.shubkamnayen.

    ReplyDelete
  6. सुन्दर लगे.सभी बोनसाई.

    ReplyDelete
  7. पाकड़ तो धाकड़ निकला भाई!

    ReplyDelete
  8. बहुत अच्छी तस्वीरें बोनसाई की।

    ReplyDelete
  9. बोनसाई देख गले में एक गोला सा आकर अटक जाता है सदा से ही...
    करीब पच्चीस वर्ष पहले एक ओरिया फिल्म देखी थी,जो बोनसाई को केंद्रबिंदु में रखकर ही बनायीं गयी थी...फर्क केवल इतना था की वहां बोनसाई कोई वृक्ष नहीं एक मनुष्य था...कहीं भी बोनसाई का पढ़ सुन देख,उस फिल्म की स्मृति हो आती है और आँखें नम हो जाती है...

    शायद लगता है आपने इसे इस एंगल से कभी देखा सोचा नहीं है....

    ReplyDelete
  10. बहुत बढ़िया तस्वीरें हैं अनुराग जी... बोनसाई मुझे बचपन से आकर्षित करता रहा है. इसके बार एमे पढना दिलचस्प है मेरे लिए. कभी भविष्य में खुद से इसकी देखभाल करना चाहूँगा.

    ReplyDelete
  11. विष्‍णु बैरागीJune 11, 2010 at 9:19 AM

    सारे चित्र निस्‍सन्‍देह सुन्‍दर हैं, बिलकुल पेशेवर केमरामेन द्वारा खींचे गए।

    ReplyDelete
  12. are waah ye to aur bhi acchi baat ho gayi mujhe bhi bahut shuak hai...main chuttiyon mein kya gayi india mere saate bonsai..ab swargeey ho gaye hain...
    bahut khush ho gaye ham to saari tasveerein dekh kar..
    haan nahi to..!!

    ReplyDelete
  13. कैसे बनाये जा सकते हैं, इस बारे में भी बतायें..

    ReplyDelete
  14. बोनसाई के बारे में तो हमारी सोच भी बहुत हद तक रंजना जी से मिलती जुलती है...इनके विकास को बाधित करने का ये कार्य..बस आत्मा नहीं मानती.कुछ गलत सा लगता है...

    ReplyDelete
  15. बहुत ही सुन्दरता से सजाया है आपने इनको!

    ReplyDelete
  16. यह पाकड क्‍या है? आपका प्रयास अच्‍छा है।

    ReplyDelete
  17. Your blog is cool. To gain more visitors to your blog submit your posts at hi.indli.com

    ReplyDelete
  18. @भारतीय नागरिक said...
    कैसे बनाये जा सकते हैं, इस बारे में भी बतायें..

    अगली पोस्ट बोनसाई पर ही सही!

    ReplyDelete
  19. बहुत ही सुन्दर हैं। मैं भी शौक रखती हूँ, मेरे शायद सच्चे बोनसाई नहीं किन्तु गमले में पौधे पालना कहा जा सकता है।
    अपने पौधों का स्वर्गवासी होना असह्य लगेगा मुझे!
    यह पुस्तक कौन सी है, जिसकी बात निर्मला कपिला जी कर रही हैं?
    घुघूती बासूती

    ReplyDelete
  20. @Mired Mirage said...
    यह पुस्तक कौन सी है, जिसकी बात निर्मला कपिला जी कर रही हैं?


    पतझड़ सावन वसंत बहार - दो महाद्वीप, चार मौसम और छः कवि.

    ReplyDelete
  21. अजित जी,
    गूलर, पीपल आदि की जाति के इस वृक्ष को प्लक्ष, पर्करी, पाकड़, पकडिया के नाम से पुकारते हैं. उत्तर प्रदेश में अपने आप उग आता है. वानस्पतिक नाम फाइकस लेकर (Ficus lacor) है. जड़ें उथली होती हैं इसलिए आंधी वगैरह में जल्दी उखड जाता है. तना कुछ-कुछ पीपल जैसा होता है और लकड़ी काफी जल्दी गलने वाली होती है. (हमारे) बरेली में तो पकड़िया नाथ नामक पवित्र स्थान भी है.

    ReplyDelete
  22. अरे ये तो बोटानिकल गार्डेन में देखे थे ...आपके पास भी इतने सारे और दिल्ली में सौ सौ ....आप महान है जी

    ReplyDelete

मॉडरेशन की छन्नी में केवल बुरा इरादा अटकेगा। बाकी सब जस का तस! अपवाद की स्थिति में प्रकाशन से पहले टिप्पणीकार से मंत्रणा करने का यथासम्भव प्रयास अवश्य किया जाएगा।