Sunday, April 26, 2026

हिंदी ग़ज़ल: अनुराग शर्मा

द्वार प्रेम के खुले हुए हों, बंद झरोखे संशय के हों,
मिटते साये छल के दिल में, बीते कल के भय के हों।

साफ़ नज़र आती है मंज़िल, साफ़ नज़र है राहों की,
मिटने हैं वे सभी निशाँ जो, रंजो-ग़म, विस्मय के हों।

कहा जो तुमने, सच ही होगा, छल शब्दों में होगा क्यों,
रिश्ते वही टिकेंगे जग में, जो प्रीति और विनय के हों।

तुमने थामा हाथ हमारा, युग तक यह विश्वास रहे, 
टूटन कैसी, रिश्ते जो हों, निष्ठा और आश्रय के हों।

फूल वही खिलते उपवन में, जिनकी रहे सलामत जड़,
झूठ की नींव गिरा दी जाये, भवन सभी विजय के हों।

Friday, March 20, 2026

🌙ग़ज़ल - तुम्हारे हैं

Happy New Year 5128 📅 "रौद्र" नामक संवत्सर पर सबको शुभकामनाएँ 🙏 *श्री शालिवाहन शक 1948, युगाब्द 5128, संवत 2083 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुढीपड़वा, नवरात्रि व हिंदू नववर्ष पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभेच्छा* 🌹

उनको कुछ इस तरह दुलारे हैं,
जैसे वे सब भी उनको प्यारे हैं।

चोट दिल की कहाँ सम्हालेंगे,
हम तो बस दर्द के सहारे हैं।

रात भर ख़ुद से बात करते हैं,
दिन में ख़ामोशियों के मारे हैं।

ज़िंदगी इक अजीब सौदा है,
हमने बस क़र्ज़ ही उतारे हैं।

कोई मंज़िल न, कोई रस्ता है,
हम तो गुज़रे हुए नज़ारे हैं।

कल की उम्मीद नहीं बाकी है,
आज भी आस पर गुज़ारे हैं।

तुम गए तब से रातें काली हैं,
चंदा है न गगन में तारे हैं।

हम तो दिन-रात इतना कहते हैं,
तुम भी कह दो कभी "तुम्हारे हैं!"
***

Thursday, March 5, 2026

लेखक को जानिये - अनुराग शर्मा के साक्षात्कार और वार्ताएँ

प्रकाशित साक्षात्कार-वार्ता, कथन-वाचन शृंखला में कुछ और साक्षात्कार यहाँ प्रस्तुत हैं।

विडियो साक्षात्कार - Video Interviews

आभार पूजा अनिल 
(किस्साटेल के लिये अनुराग शर्मा और पूजा अनिल की वार्ता हाफ़-सेंचुरी, आधी सदी का क़िस्सा पर )
https://www.facebook.com/share/v/172nDdavMp/
आभार विनीता तिवारी (सेतु के दस वर्षों पर अनुराग शर्मा और विनीता तिवारी की वार्ता)


आभार रचना श्रीवास्तव (शशि पाधा जी की पुस्तक कही-अनकही पर चर्चा)

आभार वैश्विक हिंदी परिवार - उतरी अमेरिका (प्रस्तोता: आस्था नवल)