Happy New Year 5128 📅 "रौद्र" नामक संवत्सर पर सबको शुभकामनाएँ 🙏 *श्री शालिवाहन शक 1948, युगाब्द 5128, संवत 2083 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुढीपड़वा, नवरात्रि व हिंदू नववर्ष पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभेच्छा* 🌹
सबको कुछ इस तरह दुलारे हैं,
जैसे वे सब भी उनको प्यारे हैं।
जैसे वे सब भी उनको प्यारे हैं।
चोट दिल की कहाँ सम्हालेंगे,
हम तो बस दर्द के सहारे हैं।
रात भर ख़ुद से बात करते हैं,
दिन में ख़ामोशियों के मारे हैं।
ज़िंदगी इक अजीब सौदा है,
हमने बस क़र्ज़ ही उतारे हैं।
कोई मंज़िल न, कोई रस्ता है,
हम तो गुज़रे हुए नज़ारे हैं।
कल की उम्मीद नहीं बाकी है,
आज भी आस पर गुज़ारे हैं।
तुम गए तब से रातें काली हैं,
चंदा है न गगन में तारे हैं।
हम तो दिन-रात इतना कहते हैं,
तुम भी कह दो कभी "तुम्हारे हैं!"
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