जन्म दिन शुभ हो अतुल!
प्रगति करो खुश रहो और खुशियाँ बांटो!
प्रगति करो खुश रहो और खुशियाँ बांटो!
ईश्वर को साधारण प्रिय है
बार बार रचता क्यों वरना
खास बनूँ यह चाह नहीं है
मुझको भी साधारण रहना
न अति ज्ञानी न अति सुन्दर
मिल जाऊँ सबमें वह गहना
साधारण जन विश्व चलाते
नायक प्रभु कृपा हैं पाते
साधारण अधिनायक होते
अनहोनी सम्भव कर जाते॥
(अनुराग शर्मा)