दिल के छोटे होते हैं।
उनकी हर रेवड़ी
उनके मुँह तक पहुँचती है
उनकी हर दौड़
उनके महल पर रुकती है।
हर काम लेन-देन होता है
जिसमें लेन तो लेन है ही
हर देन भी उम्मीद होती है
एक बड़े लेन की।
छोटे लोग भी बात करते हैं
तो केवल अपने बारे में
उनकी दुनिया वे ही हैं
उनका ब्रह्माण्ड भी वही हैं।
वे याद दिलाते हैं
आपको टोककर
अपने उस काम की
जिसे आपने अभी किया नहीं।
जिसे आपने अभी किया नहीं।
क्योंकि आप मसरूफ़ थे
भीतर तक धँसे हुए थे
दूसरे कामों के ढेर में
जो सब के सब उन्हीं के थे।
लेन-देन उनकी ज़िंदगी है, पर
उन्हें नहीं कोई लेना-देना
आपकी ज़िंदगी से
क्योंकि आप इंसान नहीं हैं।
उनके लिये आप एक सौदा हैं
पटे तो ठीक
नहीं तो कई और हैं ठौर
मोल-भाव करने को।
मुनाफ़े का सौदा करना
उन्हें खूब आता है
ज़िंदगी भर वही तो किया है
वही करेंगे क़यामत तक।
सटीक
ReplyDeleteसटीक विश्लेषण, दुनिया है तो हर तरह के लोग हैं इसमें, ज़्यादातर अपना नफ़ा-नुक़सान देखकर कदम उठाने वाले, पर ऐसे लोग क्या जीवन से वंचित नहीं रह जाते होंगे, सूर्योदय देखने में भला क्या फ़ायदा है, जब ऐसा सोच लेते होंगे, या चिड़िया की चहकार में क्या मिलेगा, यह सोचकर कानों को बंद किए गुजर जाते होंगे
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 11 अगस्त 2025 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
ReplyDeleteबेहतरीन
ReplyDeleteहर काम लेन-देन होता है
ReplyDeleteजिसमें लेन तो लेन है ही
हर देन भी उम्मीद होती है
एक बड़े लेन की।
बहुत सटीक 👌👌
बस फायदे और मतलब के रिश्ते जोड़़ते हैं
उनके लिये आप एक सौदा हैं
पटे तो ठीक
नहीं तो कई और हैं ठौर
मोल-भाव करने को।
लाजवाब 👌👌
बहुत सुंदर
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