Wednesday, December 10, 2014

हम क्या हैं? - कविता

उनका प्रेम समंदर जैसा
अपना एक बूंद भर पानी

उनकी बातें अमृत जैसी
अपनी हद से हद गुड़धानी

उनका रुतबा दुनिया भर में
हम बस मांग रहे हैं पानी

उनके रूप की चर्चा चहुंदिश
ये सूरत किसने पहचानी

उनके भवन भुवन सब ऊंचे
अपनी दुनिया आनी जानी

वे कहलाते आलिम फाजिल
हमको कौन कहेगा ज्ञानी

इतने पर भी हम न मिटेंगे
आखिर दिल है हिन्दुस्तानी

23 comments:

  1. वे कहलाते आलिम फाजिल
    हमको कौन कहेगा ज्ञानी ..
    बहुत खूब हर शेर लाजवाब और आखरी शेर तो मुस्कान ले आया ... आखिर दिल जो है हिन्दुस्तानी ...

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  2. इतने पर भी हम न मिटेंगे
    आखिर दिल है हिन्दुस्तानी
    बिल्कुल…बढ़िया पंक्तियाँ हैं

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  3. बहुत खूब अनुराग जी | हरेक शेर अनूठा |

    शशि पाधा

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  4. Meek shall inherit the earth! जो विनयवत होगा, वही जीतेगा!

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  5. अपनी छतरी किसी को दे दें, कभी जो बरसे पानी,
    फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी!
    /
    बहुत ख़ूब!!

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  6. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (13-12-2014) को "धर्म के रक्षको! मानवता के रक्षक बनो" (चर्चा-1826) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. धन्यवाद शास्त्री जी।

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  7. सभी एक से एक सार्थक पंक्तियाँ !

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  8. बहुत खूब...जो उनका है वही तो अपना है..

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  9. अपना तो सब बेगाना है..

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  10. सुन्दर प्रस्तुति

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  11. सुंदर प्रस्तुति।

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  12. एक सुन्दर सी ध्वनि आ रही है इस कविता से.

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  13. बहुत सुन्दर प्रस्तुति....

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  14. बहुत खूब, हिंदुस्तानी !

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  15. बहुत खूब। नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ, सादर।

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  16. लाजवाब रचना...

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