Sunday, May 17, 2009

ड्रैगन नौका उत्सव - [इस्पात नगरी से - खंड १३]

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कहते हैं कि देवता उत्सव प्रिय होते हैं। जितने देवताओं को मैं जानता हूँ, वे सब तो इस कसौटी पर खरे ही उतारते हैं। अब शास्त्रों में लिखा है कि देवताओं जैसा बनने की कोशिश करनी है, सो हम भी किसी उत्सव में शरीक होने का कोई मौका नहीं छोड़ते। कल पिट्सबर्ग में नदी तीर पर होने वाला वार्षिक ड्रैगन नौका उत्सव था तो हम भी पहुँच गए अपनी ब्लॉग-नौका लेकर। सोचा थोड़ी जानकारी अपने ब्लॉग-परिवार तक भी पहुंचा दें कुछ शब्दों और चित्रों के माध्यम से।


उत्सव में भाग लेनेवाली एक ड्रैगन नौका


फिलिपिनो वसंत नृत्य का एक दृश्य


भारतीय बालिकाएं एक कश्मीरी लोकनृत्य के दौरान


समारोह के बाद नदी के किनारे बच्चियां

अगले अंक में बात करेंगे ग्लोबल वार्मिंग की और इस बात की कि ग्लोबल वार्मिंग का मुकाबला करने के लिए किस तरह से "बाजी शाकाहारी, बेल्जियम ने मारी"
और अंत में - आज हमारे वरिष्ठ कवि और ब्लोगर श्री सत्यनारायण शर्मा "कमल" जी की पत्नी की पुण्यतिथि है। हमारी संवेदनाएं उनके साथ हैं।

[इस श्रंखला के सभी चित्र अनुराग शर्मा द्वारा लिए गए हैं. हरेक चित्र पर क्लिक करके उसका बड़ा रूप देखा जा सकता है.]==========================================
इस्पात नगरी से - अन्य कड़ियाँ
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Tuesday, April 14, 2009

वाह पुलिस, आह पुलिस - [इस्पात नगरी से - खंड १२]

पिछली कड़ी में हमने बात की थी पिट्सबर्ग पुलिस द्वारा स्थानीय डाउनटाऊन के नशीली दवाओं के एक बड़े रैकेटके भंडाफोड़ की। इसके साथ ही हमने पुलिस के त्वरित सञ्चालन के कारण एक ब्रिटिश लड़के की जान बचाने के बारे में जाना। उस कड़ी में ही मैं पिट्सबर्ग के एक उपनगर की घटना के बारे में लिखने जा ही रहा था की इसी बीच पुलिस से ही सम्बंधित एक और घटना/दुर्घटना हो गयी।

एक महिला ने आपातकालीन सेवा को फोन करके बताया की अपने घर पर ही उसकी अपने बेटे से झड़प हो गयी है और उसे मौके पर पुलिस की सहायता की ज़रूरत है। ओपेरटर द्वारा हथियारों के बारे में पूछने पर महिला ने कहा की उसके पुत्र के पास लाइसेंसी हथियार हो सकते हैं। मिनटों में ही दो नौजवान पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँच गए। जब एक वरिष्ठ अधिकारी को ड्यूटी से घर जाते समय यह बात पता चली तो वे वर्दी उतार चुकने के बावजूद उन दोनों की सहायता के लिए घटना स्थल पर पहुँच गए।

तीनों ही अधिकारियों को इस बात का अहसास नहीं था की नौसेना से निकाले गए उस गुस्सैल लड़के के पास तरह-तरह के हथियार मौजूद थे। पुलिस को देखकर उसने ऐ के ४७ से अंधाधुंध गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं। नतीजा यह हुआ की तीनों अधिकारी वहीं धराशायी हो गए।

पीछे से पहुंचे दस्ते ने बाद में उस युवक को काबू में कर लिया मगर इस समाचार के बाद सारा शहर शोकग्रस्त हो गया। शव दर्शन के लिए रखे गए और बाद में उनका पूरे सम्मान के साथ अन्तिम संस्कार किया गया। समारोह में अमेरिका भर से पुलिस के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस घटना पर स्थानीय पुलिस को जनता का सराहनीय सहारा मिला। लोगों ने मृतकों के परिवारों के लिए भी दिल खोलकर दान दिया।

अब रही बात क्रेनबेरी की। इस घटना ने यहाँ काफी लोगों को हिला दिया है। हुआ यूँ कि लगभग पाँच साल पहले एक पेट्रोल पम्प पर काम करने वाली बीस वर्षीया लडकी ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई कि किसी बदमाश ने जबरन अन्दर घुसकर उसका शील भंग किया और फ़िर कुछ नकदी लूटकर भाग गया। पुलिस आयी और अपने तरीके से जांच करती रही। जब काफी समय तक कुछ पता नहीं लगा तो पुलिस वालों ने यह कहानी निकाली कि लडकी ने ख़ुद ही पैसे चुरा लिए हैं और मालिक और पुलिस को गुमराह करने के लिए यह कहानी रची है।

मालिक ने लडकी को नौकरी से निकाल दिया और पुलिस ने उसे चोरी के आरोप में जेल में डाल दिया। दुःख की बात यह है कि उस समय वह गर्भवती थी। सवा साल तक जेल में रहने के बाद उसका मुकदमा शुरू हुआ और उसी समय सच्चाई सामने आयी।

एक दूसरे इलाके की पुलिस ने एक मिलती-जुलती घटना के लिए जब एक आदमी को पकडा तो उसने अपने अपराधों की सूची पुलिस को दी। जिसमें क्रेनबेरी की घटना भी शामिल थी। शर्मिन्दा पुलिस को पीडिता को छोड़ना ही पडा। इसके बाद पीडिता ने पुलिस और प्रशासन पर मुक़द्दमा किया। लगभग ढाई साल तक चले इस मुक़दमे को दो-तीन हफ्ते पहले इस बिना पर खारिज कर दिया गया कि चूंकि पुलिस को कड़े अपराधियों से जूझना पड़ता है इसलिए एकाध बार इस तरह की गलती हो जाना कोई अनहोनी बात नहीं है।

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Sunday, April 5, 2009

वाह पुलिस, आह पुलिस - [इस्पात नगरी से - खंड ११]

पहले तो देरी के लिए आप सब से क्षमा चाहूंगा। युगादि से लेकर राम नवमी का समय बहुत ही व्यस्त था। दैनिक कार्यों के अलावा लगभग हर शाम को कहीं न कहीं कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी था जिसमें उपस्थिति अनिवार्य थी। कल एक स्थानीय मन्दिर में (देर से मनाये गए) युगादि समारोह के संपन्न होने के साथ ही वह अस्थायी व्यस्तता पूरी होने को आयी और मैं एक बार फ़िर अपने ब्लॉग-मित्रों से मुखातिब हूँ।

इस बीच काफी कुछ घटा। हमारे डाउनटाऊन में स्थानीय पुलिस ने नशीली दवाओं के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया। बीसिओं लोग गिरफ्तार हुए और नौबत नगर के बीचों-बीच स्थित कुछ रेस्तराओं को स्थायी रूप से बंद कराने तक जा पहुँची। अंततः सहमति इस बात पर बनी कि वे रेस्तरां अब अपने यहाँ बंदूकधारी चौकीदारों को रखेंगे ताकि पुलिस की अनुपस्थिति में भी किसी भी स्थिति से स्वयं निबट सकें।

जिस समय नगर के ह्रदय में यह सब हो रहा था, लगभग उसी समय नगर के बाहर के एक व्यस्त उपनगर में इससे बिल्कुल अलग कुछ घट रहा था। मगर क्रेनबेरी उपनगर की उस घटना की बात करने से पहले आपको इतना बता दूँ कि अमेरिका की पुलिस की वाहवाही ब्रिटेन में भी हो रही है।

हुआ यूँ कि ऑक्सफ़ोर्डशायर के एक लड़के ने एक अमेरिकी लडकी से चैट करते हुए यह उगल दिया कि वह आत्महत्या करने वाला है। लडकी ने यह बात अपनी माँ को, माँ ने स्थानीय पुलिस को, पुलिस ने राष्ट्रपति भवन को, राष्ट्रपति भवन ने ब्रिटिश दूतावास को और दूतावास ने ऑक्सफ़ोर्डशायर की पुलिस को बताई। आनन्-फानन में पुलिस लड़के के घर पहुँच गयी जहाँ वह नशीली दवाओं की घातक खुराक लेकर बेहोश पडा था। समय पर की गयी कार्रवाई के कारण उस लड़के की जान बच गयी।



क्रेनबेरी में क्या हुआ, वह लिखने के लिए मुझे अपने मन को थोडा संयत करना पडेगा इसलिए जल्दी ही वापस आता हूँ।

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