कड़वा सच,
सुनाते ही रहते,
सह न पाते।
सुनाते ही रहते,
सह न पाते।
2. पर उपदेश
ज़हर सच,
औरों को ही पिलाते,
खुद न पीते।
औरों को ही पिलाते,
खुद न पीते।
3. अहंकार
कहते खरे,
कोई और जो कहे,
लगते खोटे।
कोई और जो कहे,
लगते खोटे।
4. दर्पण
सच का शीशा,
औरों को दिखाते हैं,
खुद छुपाते।
औरों को दिखाते हैं,
खुद छुपाते।

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