Saturday, September 5, 2026

सच: कुछ हाइकु खरे-खरे

1. खरे बोल से तौबा


​कड़वा सच,
सुनाते ही रहते,
सह न पाते।
2. पर उपदेश

​ज़हर सच,
औरों को ही पिलाते,
खुद न पीते।

3. अहंकार

​कहते खरे,
कोई और जो कहे,
लगते खोटे।

4. दर्पण
सच का शीशा,
औरों को दिखाते हैं,
खुद छुपाते।

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