Saturday, November 22, 2008

ज़माने की बातें - कविता

.
जो करते थे सारे
ज़माने की बातें

वो करते हैं अब
दिल दुखाने की बातें

मेरे साथ होते जो
थकते नहीं थे

वो करते कभी अब
न आने की बातें

है सब कुछ हमारा
था जिनका यह दावा

वो करते हैं सब कुछ
छिपाने की बातें

ग़मे दिल को अपने
मना लूंगा आख़िर

मैं कैसे भुलाऊँ
ज़माने की बातें।

26 comments:

  1. bahut achhi kavita aur bahut achhi kahani padhi hai. anurag ji badhayi

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  2. है सब कुछ हमारा
    था जिनका यह दावा

    वो करते हैं सब कुछ
    छिपाने की बातें.... क्या खूब लिखा है आपने .

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  3. मेरे साथ होते जो
    थकते नहीं थे
    वो करते कभी अब
    न आने की बातें
    बहूत खूब भाई...बहुत संवेदनशील रचना...
    नीरज

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  4. मैं कैसे भुलाऊँ
    ज़माने की बातें।

    बहुत गहन अभिव्यक्ति ! भाव मुखरित हो उठे हैं ! शुभकामनाएं !

    कहानी का सुंदर प्रवाह है ! आनद आया ! इसके लिए भी आपको धन्यवाद !

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  5. एक बार भारत सरकार से फिर से पुराना सवाल -"भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में छुपाये गए काले धन के बारे में किस दिन भारत सरकार स्विस सरकार से सूचना लेकर उसे सार्वजनिक करेगी?"

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  6. वक्त ने बदल डाला सब कुछ... पर भूलती नहीं जमाने की बातें ! बहुत बढ़िया.

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  7. बहुत सुन्दर !
    घुघूती बासूती

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  8. बहुत सुंदर है अनुराग भाई. बहुत ही बढ़िया ...वाह ! बेसाख्ता जुबां पे आ गया :
    ............ ......
    तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ ..

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  9. बहुत ही सुंदर लगी आप की यह सुंदर कविता, एक एक शव्द मायेने रखता है.
    धन्यवाद

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  10. कम शब्‍दों में पूरी बात । बहुत सुन्‍दर ।

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  11. सुंदर अभिव्‍यक्ति। जितने तरल भाव, उतनी ही तरल भाषा।

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  12. वाहवा बंधु सुंदर रचना के लिये बधाई स्वीकारें

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  13. कम शब्दों में सुन्दर अभिव्यक्ति

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  14. है सब कुछ हमारा
    था जिनका यह दावा

    वो करते हैं सब कुछ
    छिपाने की बातें..kyu hota hai aisey!!kavitaa bahut munbhaayii

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  15. आपकी कविता मैं छोटी छोटी लाइनों मैं बहुत गंभीर भाव भरा होता है बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  16. बहुत सुन्दर गीत है\बधाई।

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  17. लघु किन्तु संपूर्ण बात,,, बहुत उम्दा!!

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  18. "ग़मे दिल को अपने
    मना लूंगा आख़िर

    मैं कैसे भुलाऊँ
    ज़माने की बातें।"
    वाह ! बहुत हि सुन्दर एव् गहन अभिव्यक्ति.
    शुभकामनाए.....

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  19. आपको पहली बार पढ़ रहा हूं और सच मानिये एक बार को तो जान ही लेली आपने बहुत ही कातिलाना अंदाज़ में ज़माने की बातें कहे गए आप :::))))...............
    बहुत ही अच्छा लिखा है ..........



    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है आने के लिए
    आप
    ๑۩۞۩๑वन्दना
    शब्दों की๑۩۞۩๑
    सब कुछ हो गया और कुछ भी नही !!
    इस पर क्लिक कीजिए
    मेरी शुभकामनाये आपकी भावनाओं को आपको और आपके परिवार को
    आभार...अक्षय-मन

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  20. बहुत बढिया प्रस्तुति

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  21. सुंदर अभिव्यक्ति!

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  22. देर से आया ....कविता सुंदर है !

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