Monday, December 1, 2008

वसन्त - कविता

मन की उमंग
ज्यों जल तरंग

कोयल की तान
दैवी रसपान

टेसू के रंग
यारों के संग

बालू पे शंख
तितली के पंख

इतराते बच्चे
फूलों के गुच्छे

बादल के लच्छे
फल अधकच्चे

रक्ताभ गाल
और बिखरे बाल

सर्दी का अंत
मधुरिम वसंत।

(अनुराग शर्मा)

26 comments:

  1. टेसू के रंग
    यारों के संग
    इतराते बच्चे
    फूलों के गुच्छे
    रक्ताभ गाल
    और बिखरे बाल
    अद्भुत बिम्ब...अद्भुत...अनुराग जी को ढेरों बधाई....शुक्रिया आप का ऐसी नायाब रचना पढ़वाने के लिए...
    नीरज

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  2. रचना बहुत सुंदर है, मगर अभी सर्दी का आनंद शुरू ही हुआ है। रोज सुबह शाम देसी गुड़, तिल्ली की गजक, हरी सब्जियाँ, देसी बैंगन, तरह तरह के पराठे, कचौड़ियाँ, गरम जलेबियाँ, गरम लिहाफ, सूट, स्वेटर, जर्सियाँ रंग बिरंगे कपड़े और बहुत कुछ। सेहत बनाने का मौसम, डाक्टरों की छुट्टी। दो महिने इन का बजा ले लेने दीजिए। फिर वसंत याद करेंगे जो सपने की तरह आता है,फरवरी में धूल के छोटे छोटे चक्रवात (बरबूळिए) उसे उड़ा ले जाते हैं।

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  3. अनुराग जी,बहुत बढिया रचना है।बहुत सुन्दर!

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  4. बालू पे शंख
    तितली के पंख

    इतराते बच्चे
    फूलों के गुच्छे

    बादल के लच्छे
    फल अधकच्चे

    बढ़िया प्रतीकों से लैस कविता। इतनी शीघ्र वसंत ले आने के लिए धन्यवाद। धमाकों से जलते देश में शायद कुछ ठंडक हो पाए।

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  5. बालू पे शंख
    तितली के पंख

    इतराते बच्चे
    फूलों के गुच्छे

    बादल के लच्छे
    फल अधकच्चे

    बढ़िया प्रतीकों से लैस कविता। इतनी शीघ्र वसंत ले आने के लिए धन्यवाद। धमाकों से जलते देश में शायद कुछ ठंडक हो पाए।

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  6. बालू पे शंख
    तितली के पंख

    इतराते बच्चे
    फूलों के गुच्छे

    बादल के लच्छे
    फल अधकच्चे

    बढ़िया प्रतीकों से लैस कविता। इतनी शीघ्र वसंत ले आने के लिए धन्यवाद। धमाकों से जलते देश में शायद कुछ ठंडक हो पाए।

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  7. बहुत बढिया रचना। बहुत सुन्दर!

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  8. aapne to badi achchhi-achchhi cheejen dikha di.

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  9. अच्छा है। यहां सर्दी अभी यौवन पर नहीं आई। पर अन्तत: वसन्त आना ही है।

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  10. रक्ताभ गाल
    और बिखरे बाल

    सर्दी का अंत
    मधुरिम वसंत।

    लगता है आज बसंत आ ही गया है ! बधाई !
    ये लगता है आपने भी सबसे छोटी बहार की गजल लिखने का कीर्तीमान बनाया है !
    क्या ये सही है ? मुझे कविता या गजल की समझ नही है ! अंदाजे से कह रहा हूँ !
    ये कविता है या गजल है ! बस लाजवाब है ! मन प्रशन्न हो गया !

    रामराम !

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  11. रचना बहुत सुंदर है.लाजवाब है.

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  12. Bahut sundar, badai!

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  13. कोयल की तान
    दैवी रसपान

    सुन्‍दर उपमा है ।

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  14. अच्छा है भाई .. बहुत अच्छा है.

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  15. सर्दियोँ मेँ बसँत को याद कर रहेँ हैँ आप ? :)

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  16. अरे बाबा अगर सर्दी का मजा लेना है तो आजो हमारे यहां , अगर फ़िर से सर्दी का नाम ले लिया तो मान जाउगां, बाप रे अभी तो -९ ही हुयी है, साथ मे तेज हवा,
    लेकिन इतनी सर्दी मै आप की कविता की गर्माहट ने थॊडी सर्दी दुर कर दी.
    धन्यवाद

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  17. जीवंत बिम्‍बों वाली सुंदर रचना पढाने के लिए आभार।

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  18. मन की उमंग
    ज्यों जल तरंग
    कोयल की तान
    दैवी रसपान
    टेसू के रंग
    यारों के संग

    " एक नाज़ुक सी प्यारी सी कविता शायद सभी को इस बसंत का इन्तजार है"

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  19. एक बार किसी विदेशी कवियित्री के बारे में पढ़ा था कि "मैं चिड़िके पर जैसा सा हल्का, मुलायम लिखना चाहती हूं"। ये पढ़कर कुछ-कुछ वैसा ही लगा। वैसे अभी तो कुछ सर्दी पर भी होना चाहिए।

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  20. मन की उमंग
    ज्यों जल तरंग
    कोयल की तान
    दैवी रसपान
    टेसू के रंग
    यारों के संग
    बहुत सुन्दर रचना है।

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  21. आपकी लिखी धारावाहिक कहानी के बाद आज यह रचना पढ़ पाया हूँ, अब क्या मुझसे भी तारीफ़ करवायेंगे ?
    बहुत अच्छा शब्दांकन है, यह तो !

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  22. अच्छा िलखा है आपने । भावों को प्रभावशाली ढंग से अिभव्यक्त िकया है । मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-उदूॆ की जमीन से फूटी गजल की काव्यधारा । समय हो तो पढें और प्रतिक्रिया भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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  23. टेसू के रंग
    यारों के संग

    बालू पे शंख
    तितली के पंख

    इतराते बच्चे
    फूलों के गुच्छे

    मन को छू लेने वाले छंद
    आस पास बिखरे हुवे शब्दों से पिरोई कविता कविता

    अति उत्तम

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  24. बसंत को खुबसूरत शब्दों में व्यक्त किया है आपने |

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