Saturday, December 13, 2008

बहाना - कविता

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हमसे झगडा तो इक बहाना था
आ चुका जितना उसको आना था

वो तो कब से तैयार बैठा था
गोया बेकार सब मनाना था

घर की ईंटें भी ले गया संग में
सिर्फ़ फुटपाथ पर ठिकाना था

जेब सदियों से मेरी खाली थी
मेरा क्या था जो अब गंवाना था

हम थे नाज़ुक मिजाज़ पहले से
उसके बस का कहाँ रुलाना था।

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21 comments:

  1. वाह ! अप्रतिम अभिवयक्ति !

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  2. हम थे नाज़ुक मिजाज़ पहले से
    उसके बस का कहाँ रुलाना था।

    बहुत मार्मिक भावनाएं व्यक्त की गई हैं ? लाजवाब !

    राम राम !

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  3. अंतिम शेर तो गज़ब कर रहा है बधाई !

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  4. वो तो कब से तैयार बैठा था
    गोया बेकार सब मनाना था!

    वाह!यह भी खूब रही!

    सभी शेर अच्छे लगे.
    सुंदर रचना.

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  5. जेब सदियों से मेरी खाली थी
    मेरा क्या था जो अब गंवाना था

    कबीर के आसपास पहुंख्चती हैं ये पंक्तियां । सुन्‍दर ।

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  6. सारे शेर दहाड़ रहे हैं

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  7. दुख तो इसी बात का है कि 'स्मार्ट' होने के बावजूद हमारा ठगा जाना है।

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  8. बहुत ही प्यारी है... मैं नाजुक मिजाज़ का ये तो बहुत ही सुंदर है......
    दिल को भाती है आपकी ये रचना.....

    अक्षय-मन

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  9. अनुराग जी बहुत ही शानदार रचना है ,ये शेर खासकर पसंद आया :

    घर की ईंटें भी ले गया संग में
    सिर्फ़ फुटपाथ पर ठिकाना था

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  10. कौन था वह मित्र?! जो घर की ईंटें भी ले गया।

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  11. हम थे नाज़ुक मिजाज़ पहले से
    उसके बस का कहाँ रुलाना था।

    क्या बात है, बहुत सुंदर.
    धन्यवाद

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  12. खोने को नहीं कुछ भी
    पाने को जमाना है।

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  13. वो तो कब से तैयार बैठा था
    गोया बेकार सब मनाना था
    घर की ईंटें भी ले गया संग में
    सिर्फ़ फुटपाथ पर ठिकाना था


    अनुराग जी
    बहुत ही अच्छी ग़ज़ल,
    यथार्थ की बहुत करीब
    आपकी शाएरी का इंतज़ार रहता है

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  14. bahut acchhey anuraag ji...bahut bahut badhiyaa...

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  15. जेब सदियों से मेरी खाली थी
    मेरा क्या था जो अब गंवाना था

    हम थे नाज़ुक मिजाज़ पहले से
    उसके बस का कहाँ रुलाना था।
    बहुत सुंदर गजल। बधाई।

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  16. बहोत खूब लिखा है आपने ढेरो बधाई कुबूल करें ....


    अर्श

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  17. वाह ! बहुत बढ़िया.....कमाल के शेर ......लाजवाब ग़ज़ल.

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  18. जेब सदियों से मेरी खाली थी
    मेरा क्या था जो अब गंवाना था

    हम थे नाज़ुक मिजाज़ पहले से
    उसके बस का कहाँ रुलाना था।

    ये चार लाइन लाजबाब बन पड़ी है, यू ही अच्छा लिखते रहें |

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