Thursday, August 28, 2008

सब तेरा है

पिछली बार एक संजीदा कविता ब्लॉग पर रखी तो मित्रों ने ऐसी चकल्लस की कि कविता की गंभीरता किसी चुटकुले में बदल गयी। मगर एक बात तो साफ़ हुई - वह यह कि मेरे मित्रों का दिल बहुत बड़ा है और वे हमेशा हौसला-अफजाई करने को तय्यार रहते हैं। उन्हीं मित्रों के सम्मान में एक रचना और - नई भी है और आशा से भरी भी, ताकि आपको कोई शिकायत न रहे।

जिधर देखूँ फिजाँ में रंग मुझको दिखता तेरा है
अंधेरी रात में किस चांदनी ने मुझको घेरा है।

हैं गहरी झील सी आँखें कहीं मैं डूब न जाऊं
तेरी चितवन है या डाला मदन ने अपना डेरा है।

बड़ा मासूम दिखता है ये नादाँ प्यारा सा चेहरा,
चुराकर ले गया यह दिल अरे पक्का लुटेरा है।

तू आँखें बंद करले तो अमावस रात है काली
हसीं मुस्कान में तेरी गुलाबी इक सवेरा है।


36 comments:

  1. अच्छी रचना है.अगर आप दूर देश में रहकर ऐसी रचनाएँ लिख पा रहे हैं तो आपकी रचना धर्मिता को सलाम.आप जैसे लोगों से ही हिन्दी - ग़ज़ल जीवित है.......अच्छा प्रयास...

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  2. अच्छी रचना है.अगर आप दूर देश में रहकर ऐसी रचनाएँ लिख पा रहे हैं तो आपकी रचना धर्मिता को सलाम.आप जैसे लोगों से ही हिन्दी - ग़ज़ल जीवित है.......अच्छा प्रयास...

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  3. साहब ये मदन का डेरा पिताबर्ग तक फैला हुआ है !
    आजकल लगता है मदनोत्सव की बहार छाई है.

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  4. बड़ा मासूम दिखता है ये नादां प्यारा सा चेहरा,
    चुराकर ले गया यह दिल अरे पक्का लुटेरा है।


    अनुराग जी किस लुटेरे की बात कर रहे हैं?? :)

    बहुत अच्छी रचना है !!!!!!!

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  5. हैं गहरी झील सी आँखें कहीं मैं डूब न जाऊं
    तेरी चितवन है या डाला मदन ने अपना डेरा है।

    सुंदर पंक्तियाँ बधाई
    कृपया पधारे manoria.blogspot.com and knjiswami.blog.co.in
    अपनी पतझड़ सावन वसंत बहार की क्या प्रगति कृपया अवगत कराये

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  6. तू आँखें बंद करले तो अमावस रात है काली
    हसीं मुस्कान में तेरी गुलाबी इक सवेरा है।


    बहुत खूबसूरत ! ऎसी ही हँसी मुस्कान चाहिए ?
    ताऊ गंभीर त कदी होता ही कोनी , घणे ही गम
    जमाने न दे राखे सै मित्र ! हम त ब्लागरी हँसी
    खुसी खातर ही करते हैं ! जिस दिन इसमै भी गम
    घुसग्या त उसी दिन तैं यो धंधा भी बंद !
    हंसो , हंसाओ और मौज लो !

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  7. बड़ी उम्दा है ! तिवारी साहब को पसंद आयी !
    बहुत धन्यवाद !

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  8. जिधर देखूं फिजां में रंग मुझको दिखता तेरा है
    अंधेरी रात में किस चांदनी ने मुझको घेरा है।

    वाह साहब ! ये हुई दिल लायक बात !
    बहुत ही सुंदर !!!

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  9. जिधर देखूं फिजां में रंग मुझको दिखता तेरा है
    अंधेरी रात में किस चांदनी ने मुझको घेरा है।

    वाह साहब ! ये हुई दिल लायक बात !
    बहुत ही सुंदर !!!

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  10. aap bhi pakke lutere ho,thok me taarif lut le jaate ho.bahut badhiya,badhai

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  11. जिधर देखूं फिजां में रंग मुझको दिखता तेरा है
    अंधेरी रात में किस चांदनी ने मुझको घेरा है।

    बहुत स्मार्ट लिखा है इंडियन भाई .... बहुत खूब. बधाई स्वीकारें ..... लिखते रहें

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  12. waah anurag jee ye huyi na baat..matalab ki ab aaye na sahi raste par.

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  13. bahut masoom sa saundarya aur aapke shabdon ke narmiyat.......subhanallah

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  14. बड़ा मासूम दिखता है ये नादां प्यारा सा चेहरा,
    चुराकर ले गया यह दिल अरे पक्का लुटेरा है।
    बहुत सुंदर ..अच्छी लगी यह पंक्तियाँ

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  15. भले आदमी कोई पाठक इसे कविता कहता तो हम नजर अंदाज कर देते पर आप तो इसे गजल कहिये.....

    बड़ा मासूम दिखता है ये नादां प्यारा सा चेहरा,
    चुराकर ले गया यह दिल अरे पक्का लुटेरा है।

    ये शेर अच्छा है...

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  16. दो लाइनें समर्पित करता हूं:-

    'सब कुछ लुटा दिया तेरे प्यार में सितमगर
    इक भैंस बच गई थी वो आज बेच दी'

    हाय.. रे. ये इश्क..

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  17. बहुत सुंदर गजल है.

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  18. .

    शर्मा जी, बहुत ही अच्छी ग़ज़ल है, वैसे तो..
    इतनी सारी तारीफ़ों में मेरी भी जुड़ जाये ।

    किंतु यहाँ एक सहज सा प्रश्न मेरे मन में आरहा है,
    यह शादी के पहले लिखी रचना है, या शादी के बाद ?
    स्थितियों के हिसाब से ही इसका सटीक रस निर्धारित किया जा सकता है !

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  19. बड़ा मासूम दिखता है ये नादां प्यारा सा चेहरा,
    चुराकर ले गया यह दिल अरे पक्का लुटेरा है।

    -वाकई लूट लिया इन पँक्तियों ने!!!

    बहुत उम्दा!!

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  20. 'सब कुछ लुटा दिया तेरे प्यार में सितमगर
    इक भैंस बच गई थी वो आज बेच दी'


    भाई योगीन्द्र मौदगिल जी थारा शेर म अगर
    भैंस न झोठ्ठी कह देते त के भैस की इज्जत
    ख़राब हो री थी ? क्यूँ की म्हारी अगली पोस्ट
    की हिरोइन भैंस सै ! उसको साइनिंग अमौन्ट भी
    दे दिया सै ! पिक्चर १४ रील शूट हो गी सै !
    क्लाइमेक्श की शूटिंग चाल री सै !
    जल्दी ही रिलीज कर रहे हैं !

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  21. पिछली बार एक संजीदा कविता ब्लॉग पर रखी तो मित्रों ने ऐसी चकल्लस की कि कविता की गंभीरता किसी चुटकुले में बदल गयी।

    वास्तव में ब्लॉग पर कभी एक प्रकार का रिस्पॉंस की अपेक्षा करते हैं और मित्रगण उसे किसी अन्य दिशा में ले जाते हैं।
    मेरे साथ कई बार ऐसा हुआ है।

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  22. हमेँ तो ये गज़ल बहुत पसँद आई !

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  23. भाई वाह, गजब। आज तो आप पूरे मिजाज में हैं। ऐसे ही जमाए रहिए यारों की महफिल। शुभकामनाएं।

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  24. chura kar le gaya ye dil pakka lutera hai, poori rachana achhi hai. ek badhiya khurak dene ke liye dhanyawad.

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  25. हमेँ भी ये गज़ल बहुत पसँद आई !
    अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई

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  26. भाई साहिब सब ने इतनी तारीफ़ कर दी अब मेरी तारीफ़ फ़ीकी लगेगी, इस लिये इस गरीब की राम राम ही ले ले.
    धन्यवाद

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  27. बड़ा मासूम दिखता है ये नादां प्यारा सा चेहरा,
    चुराकर ले गया यह दिल अरे पक्का लुटेरा है।

    -वाकई लूट लिया इन पँक्तियों ने!!!

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  28. तू आँखें बंद करले तो अमावस रात है काली
    हसीं मुस्कान में तेरी गुलाबी इक सवेरा है।
    भाई वाह...आप का ये अंदाज़ बहुत दिलकश लगा...आप वो इंडियन हो जिस पर हर इंडियन को नाज हो सकता है...फ़िल्म अभिनेता अजित जी की आवाज में...वैरी स्मार्ट...
    नीरज

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